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दर्द किसान का (हरियाणवी)

डॉ सुलक्षणा अहलावत

डॉ सुलक्षणा अहलावत

गीत

August 11, 2016

कोय ना समझदा दुःख एक किसान का।
होरया स जोखम उसनै आपणी जान का।।

जेठ साढ़ के घाम म्ह जलै वो ठरै पौ के जाड्डे म्ह।
कोय बी ना काम आवै उसकै भई बखत आड्डे म्ह।
किसान की गरीबी प हांसै भई लोग ब्योंत ठाड्डे म्ह।
मन नै समझावै वो के फैदा औरां का खोट काड्डे म्ह।
कर्म कर राखै माड़े दोष के उस भगवान का।।
सोलै दिन आये प मुँह बंद होज्या जहान का।।

कर्जा ठा ठा फसल बोये जा करकै नै कुछ आस।
कदे सुखा पड़ज्या कदे बाढ़ आज्या होज्या नाश।
कर्मा का इतना स हिणा फसल बी ना होती खास।
दुःख विपदा म्ह गात सुखज्या बनज्या जिंदा लाश।
मन म्ह न्यू सोचे जा जीना के हो स कर्जवान का।।
बेरा ना कद सी पहिया घुमैगा बखत बलवान का।।

बालकां का कान्ही देख देख खून सारा जल ज्या स।
भूखे तिसाये रहवैं आधी हाणा न्यू काया गल ज्या स।
गरीबी के कारण देखदे माणसा का रुख बदल ज्या स।
कदे दो पिस्से ना माँग ले सोच के मानस टल ज्या स।
रोज करना पड़ै स सब्र पी कै जहर अपमान का।।
माथे की लिखी के आगे के जोर चालै इंसान का।।

गुरु रणबीर सिंह नै बहोत समझाया पढ़ लिख ले।
हो ज्यावैगा कामयाब बेटा ढ़ाई अखर तू सीख ले।
याद कर उन बाताँ नै जी करै ठाडू ठाडू चीख ले।
इसे जमींदारे तै आछा कितै जा कै मांग भीख ले।
सुलक्षणा नै ठाया बीड़ा साच स्याहमी ल्यान का।।
बालकपन तै स खटका उसकै कलम चलान का।।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

Author
डॉ सुलक्षणा अहलावत
लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ... Read more