May 12, 2021 · मुक्तक
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दर्द-ए-कोरोना

वक्त गूँगा नहीं होता है,
बड़ा सयाना होता है,
वक्त आने पर बता देता है,
किसका जमाना होता है।
*******************(1)

हाथ से हाथ मिलाएं तो कैसे ?
नजदीकियों को दिल मेँ छुपाये तो कैसे?
तू अगर बख़्स दे , जहां फ़ुर्सत में हो जाये,
अपनों को गले लगाए तो कैसे ?
************************(2)

सांसों पर मास्क का राज है,
सहमा -२ सा हर कोई आज है,
मानव को इन्सां बनाने का ,
शायद वक्त का ये आगाज़ है।
************************(3)

प्रकृति तेरा रूठना भी जरूरी था,
इंसान का घमंड टूटना भी जरूरी था,
हर कोई खुद को खुदा समझ बैठा था यहां,
उनका ये बहम टूटना भी जरूरी था।
****************************(4)

नाज था मुल्कों को अपने परमाणु पर,
करने लगे थे प्रयोग बायो जीवाणु पर,
सारी वैज्ञानिकता धरी की धरी रह गयी,
कायनात बेवस हो गयी छोटे से कीटाणु पर।
*********************************(5)
𝓐𝓼𝓱𝓸𝓴 𝓢𝓱𝓪𝓻𝓶𝓪 _ 𝓛𝓪𝔁𝓶𝓲𝓰𝓪𝓷𝓳
***********************************

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Ashok Sharma
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"सीखाने वाला एक शिक्षक और सीखने वाला एक विद्यार्थी।'' निवास: लाला छपरा, लक्ष्मीगंज, कुशीनगर,U.P. M.A.(Eco),... View full profile
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