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दरमियां

Neelam Sharma

Neelam Sharma

कविता

June 5, 2017

उन्वान- दरमियां……।

हर रोज़ न सही मगर कभी कभी
दरमियां तेरे मेरे कुछ तो है अजनबी
खींचता है मुझे किसी चुंबक की तरह।

है अंजाना सा जो रिश्ता, मैं क्या नाम दूं उसको
अब तू ही बतादे महबूबा नाज़नीं दिलकश हसीं।
कुछ खास है कुछ पास है हम-दोनों के दरमियान
इक आस है आभास है हम दोनों के दरमियान।
दूर होकर भी कुछ पास है हम-दोनों के दरमियान।
धड़कन हृदय की और सांसों का अहसास है हम दोनों के दरमियान

कुछ दूरी है मजबूरी है हम दोनों के दरमियान
रिश्तों की जीहुजुरी है हम दोनों के दरमियान।
कुछ सपने कुछ अपने है हम दोनों के दरमियान।
कुछ वादे कुछ इरादे हैं हम दोनों के दरमियान।
क्या मोहब्बत का भी कुछ खुमार है हम दोनों के दरमियान?
त़करार जो होती है नीलम तेरे और उसके दरमियां
बेशुमार प्यार है उस तकरार में तुम दोनों के दरमियान।

नीलम शर्मा

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Author
Neelam Sharma
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