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***दरद जिया का ***

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 12, 2017

* सावन आयो सजनवा ना आयो जी
** लायो बहार संग दुःखवा भी लायो जी।
*** रिमझिम बरसे बदरिया से बुंदियां
**** झरझर बरसे हैं गोरिया के अंसुवा।
***** यूं घुलमिल गए दोनों
****** न पहचाने कोई।
******* कौन सा है अंसुवा
******** और कौन सी है बुंदिया।

—-रंजना माथुर दिनांक 27/06/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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