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“दण्ड”

aparna thapliyal

aparna thapliyal

लघु कथा

May 29, 2017

नयन आज बहुत खुश था,उसके तेरहवें जन्मदिवस पर मामाजी उपहार में एक असली क्रिकेट सेट ले कर आये थे,कब से उसके मन मे इसी उपहार की तमन्ना थी,दोस्तों को फोन पर ही चहक चहक कर खबर कर दी ,आज तो पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे थे
दुनिया मुट्ठी में थी.इन्तजार था तो बस कल का ,रोमांच के मारे रात भर नींद भी नहीं आई।सुबह उठते ही बस्ता तैयार किया क्रिकेट सेट संभाला और स्कूल बस का इन्तजा़र शुरू हुआ,आज घड़ी की रफ्तार जैसे मंदी पड़ गई थी।खैर बस आई ,स्कूल की दिनचर्या प्रारंभ हुई ,जैसे तैसे चार पीरियड गुज़रेऔर मध्यावकाश की घंटी बजी सारे दोस्तों ने चलते चलते ही टिफिन खत्म किया,दौड़ कर मैदान में पहुँच फील्ड सजा ली।सुकेश की बैटिंग,रजत बालिंगंऔर नयन सिली पाइन्ट पर फील्डर,
पहली बाल-सुकेश आउट काट बाई नयन,
दूसरी बाल- रंजन आउट अगेन काट बाई नयन
‘वाह यार ,तेरा जवाब नहीं ,आज तो हैट्रिक पक्की ‘!
रोमांच बढ़ चुका सब साँस रोके तैयार
तीसरी बाल-पल्लव का जोरदार स्ट्रोक बाल उड़ती हुईं नयन की तरफ ,नयन लपकने को तैयार ,ज़रा सी चूक और बाल हाथ मे आने के बजाय नयन की कनपटी से आ टकराई ,एक चीख के साथ वही ं गिर पड़ा नयन।
बच्चों ने ,स्कूल ने हर संभव कोशिश की पर नयन को बचाया न जा सका।
पड़ताल में यही साबित हुआ कि कोई दोषी नहीं़
बच्चे नियमानुसार खेल रहे थे।
कुछ ही दिनों में मुख्यालय से फरमान जारी हुआ-
अबसे मध्यावकाश में सभी छात्र शिक्षकों की निगरानी में कक्षा कक्ष में ही बैठे रहेंगे…..
अपर्णा थपलियाल”रानू”

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