कविता · Reading time: 1 minute

थोड़ी सी खुशी दे पाऊ

देख कर तेरी खुशी मैं गमगीन हो गया। क्योंकि मैं दीपक की तरह जलता रहता हूं।और बुझे हुए दीपक को जलाया करता हूं। क्योंकि मैं एक छोटा सा दीपक भानू से हाथ नहीं मिला सकता हूं। इसलिए जुगनू को ताने मारा करता हूं। मैं दीपक की तरह जलता रहता हूं। जहां भी अंधेरा हो वहां पहुंच जाता हूं। थोड़ी सी भी घर किसी को दे पाऊं। वहीं जतन करता रहता हूं।

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