Oct 28, 2018 · कविता
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थाली छेद कर आया राजनीति में

घर की थाली छेद कर देखो,राजनीति में आया है
खुद का पाव पसारन खातिर,हुड़दंग खूब मचाया है
किसानों का खाकर उसने,अपना परिवार खिलाया है
जाति धर्म का दंगा करके,अपना राज बसाया है
मानवता का दहन कराकर,झंडा बुलंद फहराया है
समाज सेवी का खोल पहन कर,वोट खूब कमाया है
स्वार्थ तुम्हारा दिख लाकर,उसने बंगला कोठी बनवाया है
अपना दुखड़ा,गाकर उसने,राष्टीय शौर्य कमाया है
भूख मरी का दृश्य दिखाकर,थाली खूब सजाया है
राजनीति का दांव खेल कर,मजा सदा उड़ाया है
दूसरे के थाली का दाना देख, सदा ललचाया है
जनता को ओ मूर्ख बना कर,थाली खूब सजाया है
वादों की झड़ी लगा कर उसने,खाना खूब पचाया है
घर की थाली छेद कर उसने,राजनीति में आया है

राइटर :- इंजी० नवनीत पाण्डेय सेवटा (चंकी)

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ER.NAVANEET PANDEY
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नाम:- इंजी०नवनीत पाण्डेय (चंकी) पिता :- श्री रमेश पाण्डेय, माता जी:- श्रीमती हेमलता पाण्डेय शिक्षा:-... View full profile
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