थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं

थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं,
विपदा में मिट जाऊं,राह छोड़ हट जाऊं,
वह सहारा नहीं हूँ मैं,
थक गया हूँ पर हारा नहीं हूँ मैं,
मंजिल से दूर सही,बदगुमान बेख़ौफ़ नहीं,
भान है मुझे परवाह तुम्हारी भी,
जो समझोे तो मंजिल मिले,
न समझो तो ये तकदीर तुम्हारी ही l

जीवन-पथ पर जो चाहे वह पथ तुम चुन लेना,
सरपट दौड़ो या उठ-गिर, गिर कर सम्हल लेना,
जो चाहे वह पथ तुम चुन लेना,
अन्धकार वीरान यहां हर उपवन,वह बचपन,
आँखों में आंसू दिखे तो थोड़ा तुम भी रो लेना,
जीवन पथ पर जो चाहे वह पथ तुम चुन लेना,

मैं जिस मोड़ पर खड़ा देखता हूँ, जीर्ण-शीर्ण हुआ वतन,
आँख मूदे सिर झुकाए निकल जाऊं,
धिक्कार मुझे व्यर्थ रहा मेरा जीवन,
पर जीवन-पथ पर जो चाहे,
वह पथ तुम चुन लेना,
सरपट दौड़ो या उठ -गिर,गिर कर सम्हल लेना,
जो चाहे वह पथ तुम तुम चुन लेना,
अन्धकार वीरान यहां हर उपवन,वो बचपन,
आँखों में आंसू दिखे तो थोड़ा तुम भी रो लेना,
जीवन पथ पर जो चाहे वह पथ तुम चुन लेना ।।
मृदुल चंद्र श्रीवास्तव

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