.
Skip to content

त्रिभंगीलाल

निहारिका सिंह

निहारिका सिंह

अन्य

November 10, 2017

।।१।।
मैं रवि तुम चाँद से
मैं काया तुम प्राण से ..
मैं बसुरी तुम बसुरी की धुन !
मेरा प्रेम त्रिभंगीलाल से ..

।।२।।
पुष्प करती हूँ समर्पित
हे ईश ! मेरी आकांक्षाओं का
पात्र अब खाली पड़ा है …
आत्म करती हूँ मैं अर्पित
हे आर्य ! मुझ में तेरी उपस्थिति का
भान अब होने लगा है ….
पुष्प करती हूँ समर्पित ……

निहारिका सिंह

Author
निहारिका सिंह
स्नातक -लखनऊ विश्वविद्यालय(हिन्दी,समाजशास्त्र,अंग्रेजी )बी.के.टी., लखनऊ ,226202।
Recommended Posts
मैं बेटी हूँ
???? मैं बेटी हूँ..... मैं गुड़िया मिट्टी की हूँ। खामोश सदा मैं रहती हूँ। मैं बेटी हूँ..... मैं धरती माँ की बेटी हूँ। निःश्वास साँस... Read more
मेरे साँवरे तुम
मैं टूटा हुआ हूँ, मैं बिखरा हुआ हूँ, मुझे अब संभालो, मेरे साँवरे तुम. भंवर मे मैं देखो, धसा जा रहा हूँ, यहाँ से निकालो,... Read more
-: राज़-ए-मुश्कान :-
तुम्हारी नजरो की कसम, तुमपे फ़िदा हूँ मैं, लाख करू कोशिश विसाल की, मगर तुमसे जुदा हूँ मैं, तुम्हारी जुल्फों की कसम, बहुत मजबूर हूँ... Read more
मैं तुमसे मिलके ऐसा हो गया हूँ
मैं तुम से मिलके ऐसा हो गया हूँ हज़ारों में भी तन्हा हो गया हूँ न कोई कारवां ना हम सफ़र है मुसाफ़िर हूँ अकेला... Read more