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** त्यौहार अभी नया है **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

March 20, 2017

क्या अंदाज-ए-बयां है
त्योंहार अभी नया है
कोई आया कोई गया
बस अपनी तो आज
दिल में जली होली है
कुछ भी कहो आज
होली फिर होली है
अरमानों की निकली
आज फिर डोली है
अपनी तो फिर भी
मीठी मधुर बोली है
आपने आज फिर
मिश्री -सी घोली है
शायद जुबां ने फिर
हैप्पी होली बोली है
रंगो से रंगीली होली
आपको सपरिवार
मुबारक मुबारक ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में... Read more
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