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*** तौबा इन इश्कवालों से ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

July 31, 2017

कब तलक
बरसने का
इंतजार करते
रहे तुम
आज
तुम ही
कहते हो
बस करो
अब और नही
क्या बादल भी
कभी माना है
मनाने से नहीं
बरसा तो नहीं
जब बरसा तो
हाय तौबा
कैसी मुहब्बत है
तुम्हारी
स्वार्थ से भरी
यारी
तौबा
इन इश्क
वालों से
कर लो
ये कभी
अपने ना हुए
तो यारों के
क्या होंगे ।।
. ?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
From: मुक्ता प्रसाद नगर , बीकानेर ( राजस्थान )
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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