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तो सच बताएगा कौन?

शिवदत्त श्रोत्रिय

शिवदत्त श्रोत्रिय

गज़ल/गीतिका

November 2, 2016

अगर दोनो रूठे रहे, तो फिर मनाएगा कौन?
लब दोनो ने सिले, तो सच बताएगा कौन?

तुम अपने ख़यालो मे, मै अपने ख़यालो मे
यदि दोनो खोए रहे, तो फिर जगाएगा कौन?

ना तुमने मुड़कर देखा, ना मैने कुछ कहाँ
ऐसे सूरते हाल मे, तो फिर बुलाएगा कौन?

मेरी चाहत धरती, तुम्हारी चाहत आसमान
क्षितिज तक ना चले, तो मिलाएगा कौन?

मेरी समझ को तुम, तुम्हे मै नही समझा
इस समझ को हमे, आज समझाएगा कौन?

लड़खडाकर गिरे उठे, ढूढ़ने अपनी मंज़िल
नजरो मे गिरे अगर, तो बचाएगा कौन ?

लब दोनो ने सिले, तो सच बताएगा कौन?

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय

Author
शिवदत्त श्रोत्रिय
हिन्दी साहित्य के प्रति रुझान, अपने विचारो की अभिव्यक्ति आप सब को समर्पित करता हूँ| ‎स्नातकोत्तर की उपाधि मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान से प्राप्त की और वर्तमान समय मे सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर मल्टी नॅशनल कंपनी मे कार्यरत... Read more
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