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तो याद करना

अमरेश गौतम

अमरेश गौतम

गीत

July 15, 2016

कोई दर्द, कोई चुभन जब हद से गुजर जाए,तो याद करना,
जिन्दगी में कभी जरूरत पड़ जाए,तो याद करना।

बिछड़ते वक्त के ये आखिरी, अल्फाज थे उनके,
जो अब तक सम्भाले रक्खा, यही राज थे उनके।
ये वो पल थे जो,अब तक भुलाये न गये,
मैने छिपाये रक्खा,जो हमराज थे उनके।
उसने तड़प के कह दिया, न बर्बाद करना,
जिन्दगी में कभी जरूरत पड़े,तो याद करना।

उस वक्त इज़्तिराब में, सोचा न गया,
आँसू भी रुखसार का,पोंछा न गया।
उसने छिपाए दर्द,दामन के आड़ में,
मुझसे छुपाया अश्क,समूचा न गया।
गैरों के सामने न,फरियाद करना,
जिन्दगी में कभी जरूरत पड़ जाए,तो याद करना।

Author
अमरेश गौतम
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता
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