बाल कविता · Reading time: 1 minute

तोहफे में बंदूक

पापा बर्थडे पर कुछ नहीं लेना
मेरी मर्जी की चीज दिला देना

इक बंदूक दिला देना तोहफे में
दागूं गोली दुश्मन के सीने में

इस देश पर जो भी नजर उठाएगा
निशाने पर वह मेरे आ जाएगा

बाज न आएगा जो गद्दारी से
मारूंगा उसको जिम्मेदारी से

अब तो मैंने मन में यह ठाना है
मुझको भारत की शान बढ़ाना है

© अरशद रसूल

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