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तेवरी

कवि रमेशराज

कवि रमेशराज

तेवरी

May 18, 2017

हिंसा से भरा हुआ नारा अब बोले धर्म बचाना है
हर ओर धधकता अंगारा अब बोले धर्म बचाना है |
जो कभी सहारा नहीं बना अपने बूढ़े माँ-बापों का
ऐसा हर लम्पट-आवारा अब बोले धर्म बचाना है |
बस्ती-बस्ती भय पसर रहा, सदआशय थर-थर काँप रहे
संवेगों का चढ़ता पारा अब बोले धर्म बचाना है |
धरती पर बहता खून देख ‘ गौतम ‘ की आँखों में आँसू
हंसों का पापी हत्यारा अब बोले धर्म बचाना है |
गाँधी को गाली ये देता लेता संतों का नाम नहीं
असुर सरीखा-मतिमारा अब बोले धर्म बचाना है |
+रमेशराज

Author
कवि रमेशराज
परिचय : कवि रमेशराज —————————————————— पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त, पिता- लोककवि रामचरन गुप्त, जन्म-15 मार्च 1954, गांव-एसी, जनपद-अलीगढ़,शिक्षा-एम.ए. हिन्दी, एम.ए. भूगोल सम्पादन-तेवरीपक्ष [त्रैमा. ]सम्पादित कृतियां1.अभी जुबां कटी नहीं [ तेवरी-संग्रह ] 2. कबीर जि़न्दा है [ तेवरी-संग्रह]3. इतिहास घायल है [... Read more
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