.
Skip to content

तेवरी

कवि रमेशराज

कवि रमेशराज

तेवरी

May 6, 2017

उसकी बातों में जाल नये
होने हैं खड़े बवाल नये |
बागों को उसकी नज़र लगी
अब फूल न देगी डाल नये |
छलना है उसको और अभी
लेकर पूजा के थाल नये |
बिल्डिंग की खातिर ताल अटा
अब ढूंढ रहा वो ताल नये |
आँखों से आँसू छलक रहे
अब और कहें क्या हाल नये |
+रमेशराज

Author
कवि रमेशराज
परिचय : कवि रमेशराज —————————————————— पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त, पिता- लोककवि रामचरन गुप्त, जन्म-15 मार्च 1954, गांव-एसी, जनपद-अलीगढ़,शिक्षा-एम.ए. हिन्दी, एम.ए. भूगोल सम्पादन-तेवरीपक्ष [त्रैमा. ]सम्पादित कृतियां1.अभी जुबां कटी नहीं [ तेवरी-संग्रह ] 2. कबीर जि़न्दा है [ तेवरी-संग्रह]3. इतिहास घायल है [... Read more
Recommended Posts
नित्य नये षडयंत्र
मात्र ख़िलौना रह गया अपना अब गणतंत्र ! भ्रष्टाचारी देश का , चला रहे जब तंत्र ! राजनीति मे आज की, आती है दुर्गन्ध ,... Read more
जिंदगी को हँसाना नये साल में
रंज ओ गम मिटाना नये साल में, जिंदगी को हँसाना नये साल में।। छोड़ मसरूफियत की ये झूठी जबाँ हाथ आगे बढ़ाना नये साल में।।... Read more
नये शिल्प में रमेशराज की तेवरी
कोई तो किस्सा पावन हो, वृन्दावन हो अब चैन मिले मन को कुछ तो | तहखानों बीच न जीवन हो, घर-आँगन हो सुख के पायें... Read more
नये साल में सब
सभी को हंसाएँ नये साल में सब मुहब्बत लुटाएँ नये साल में सब भुलाकर गमों और रंज की सजाएँ गले से लगाएँ नये साल में... Read more