दोहे · Reading time: 1 minute

#दोहे – बरसात पर

धरा हुयी बेचैन जब , घन लाए बरसात ।
प्रेम उसे ही सब कहें , समझे जो ज़ज़्बात।।

सूखे नद तालाब थे , तरुवर सभी उदास।
बारिश ने आकर इन्हें , दिया नया उल्लास।।

गर्मी से बेहाल थे , सबको मिली निजात।
जोश उमंगे भर गयी , बारिश बन सौग़ात।।

घोर प्रदूषण धुल गया , हरियाली चहुँ ओर।
वर्षा के उत्साह से , महका भू हर छोर।।

बूढ़े युवा किशोर मन , उत्साहित हैं आज।
बरसे बादल ओज में , ख़ुशी धरा सिर ताज।।

मेघ गगन में देख कर , करता मोर पुकार।
सुन अंतर आवाज़ को , बरसाएँ घन प्यार।।

सूखी भू घन धार से , सौंधी भरे सुगंध।
आकर्षित हर मन करे , बाँधे अपने बंध।।

#आर.एस.’प्रीतम’
#सर्वाधिकार सुरक्षित दोहे

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Author
🌺🥀जीवन-परिचय 🌺🥀 लेखक का नाम - आर.एस.'प्रीतम' जन्म - 15 ज़नवरी,1980 जन्म स्थान - गाँव जमालपुर, तहसील बवानीखेड़ा,ज़िला-भिवानी,राज्य- हरियाणा। पिता का नाम - श्री रामकुमार माता का नाम - श्री…
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