May 20, 2017 · कविता
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तेरे बिन

तेरे बिन
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मै यहाँ हूँ
दिल वहाँ है
बिखरा बिखरा सा अपना जहां है
सपनों की इस दौड़ में खोये
अपने गुम जाने कहाँ हैं

तेरी याद
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तेरी यादों के गुलदस्ते से
नन्ही कली जो
फूल बन मुस्काई
महका मेरा रोम रोम
हर अंग से
तेरी खुश्बू आई

लोधी डॉ. आशा ‘अदिति’
बैतूल (म.प्र.)

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मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ,... View full profile
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