तेरे बगैर दुनिया में कौन सगा है माँ

**** तेरे बगैर दुनिया में कौन सगा है माँ ****

तेरे वजूद से मेरा , वजूद बना है माँ
तेरे बगैर दुनिया में, कौन सगा है माँ

नही है ताकत जमाने में तुझे हरादे जो
तेरी दुआओं से मेरा , रूतवा जवां है माँ

ना मंदिर जाता हूँ , ना पढता हूँ कुरान को
तेरे कदमों को छूकर, सब पा लेता हूँ माँ

पूरी दुनिया में कोई नही है , तुझसे सुंदर
मुझे अपनी बांहो में , आज भरले माँ

बदनसीब है वो होती नही है , माँ जिनकी “सागर”
बदनसीब वो भी है , जो माँ को माँ नही कहता माँ
************
बैखोफ शायर/गीतकार/लेखक
डाँ. नरेश कुमार “सागर”
************
मर्दस.डे . की हार्दिक शुभ कामनाऐं

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 65

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share