तेरे प्यार के खर्चे

तेरे प्यार के खर्चे बहुत हैं
मेरी मुहब्बतों का उधार बहुत है
तू…. तेरा खर्च कर
पर मेरा क्यों लूटाता है
तेरे हिस्से में अब
सबसे बड़ा मेरा खाता है
जो जमा करना है…… उसमें कर
जो खर्च करना है
मुझ पर कर
तेरे प्यार की
तेरी मुहब्बतों के इस खजाने की
अकेली हकदार…….. मैं हूँ
क्या पहरेदार भी मैं हूंँ ??
तेरा वारिस…….. तेरा नाम
मुझ में है……. मेरे से है
तेरे प्यार के काबिल……. बस मैं
तेरी मुहब्बतों का हासिल
बस मैं
तू मेरी वसीयत है……तू मेरी धरोहर है
फ़िर तेरे प्यार की
यह कैसी फितरत है ??
जो मेरा है……. जो तुझ में है
वह सब मुझ पर लुटा दे
और अपनी मुहब्बतों को
कंजूसी से बचा बचा कर
मेरे प्यार के खाते में जमा कर दे ।।

(सर्वाधिकार सुरक्षित स्वरचित अप्रकाशित मौलिक रचना. सीमा वर्मा)

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