May 12, 2021 · कविता
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️️तेरे नयना️️

तेरे नयना जो भीग गए
ऐसा लगा बरसात हो गई
मैं उसमें ही भीगता रहा
और दिल की बात हो गई
तेरे नयना ओ तेरे नयना
मेरे नयनों से जब मिल गए।।

मेरी जिंदगी बन गए
मुझसे जो कह गए
दिल में बसाओ मुझे
आंखों से ये कह गए
तेरे नयना ओ तेरे नयना
मेरे नयनों से जब मिल गए।।

देखकर आज उसको
सपने मेरे पूरे हो गए
जो नयन उसके आज
मेरे नयनों से मिल गए
तेरे नयना ओ तेरे नयना
मेरे नयनों से जब मिल गए।।

जैसे पुरानी शाखों पर
फिर से फूल खिल गए
उदास किसी चेहरे को
हंसी के तार मिल गए
तेरे नयना ओ तेरे नयना
मेरे नयनों से जब मिल गए।।

मेरी जिंदगी संवर गई
दर्द दिल के दूर हो गए
वीरान जिंदगी को भी
जीने की उम्मीद दे गए
तेरे नयना ओ तेरे नयना
मेरे नयनों से जब मिल गए।।

जैसे अंधेरे को सूरज और
जीवन को सांस मिल गए
देखकर तेरे इन नयनों को
समय के पहिए भी रुक गए
तेरे नयना ओ तेरे नयना
मेरे नयनों से जब मिल गए।।

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Surender sharma
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