मुक्तक · Reading time: 1 minute

तेरी हर चाल से वाकिफ हूँ मैं

तेरी हर चाल से वाकिफ हूँ मैं
अनजाने सफ़र का ठहरा मुसाफ़िर हूँ मैं
सोच समझकर रखा है क़दम अंगारों में
घायल सिरफिरा सा आशिक़ हूँ मैं

भूपेंद्र रावत
21।04।2020

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