Skip to content

तेरी सूरत

DESH RAJ

DESH RAJ

गज़ल/गीतिका

February 2, 2017

जहाँ भी देखता हूँ , इस “जहाँ” में तेरी सूरत नज़र आती है,
तेरी सूरत में इस “ जहाँ ” की सारी खुशियाँ नज़र आती है ,

तेरी एक नज़र ने मुझको किस मुकाम पर ला दिया ?
खुद “शमां” में जलकर रोशनी के समंदर में बिठा दिया,
तूफानों के बीच प्यार का दीपक मेरे हाथ में जला दिया ,
मेरी डूबती नैय्या को इस “जहाँ के मांझी” से मिला दिया I

जहाँ भी देखता हूँ, इस “जहाँ” में तेरी सूरत नज़र आती है,
तेरी एक नज़र से बिगड़ी हुई तक़दीर भी संवर जाती है ,

“ राज ” को नहीं था, अब तक यह भान ,
अब वो न रहा वह इस राज से अनजान ,
छणभंगुर जीवन पर था उसे बहुत अभिमान ,
तेरी सूरत के सामने चूर हो गया मेरा गुमान ,
“परम पिता ” की सूरत को गया अब पहचान I

जहाँ भी देखता हूँ, इस “जहाँ” में तेरी सूरत नज़र आती है,
इस सूरत में जगत के पालनहार की तस्वीर नज़र आती है I

देशराज “राज”

Author
DESH RAJ
Recommended Posts
तेरी यादो का सहारा है
अब तो बस तेरी यादो का सहारा है यह दिल तेरे बिन बेसहारा ही बेसहारा है तेरी जुदाई मुझे हर पल तडपाती है जब भी... Read more
मुक्तक
जब भी यादों की तस्वीर नजर आती है! तेरे ख्यालों की जागीर नजर आती है! मैं जब भी ढूँढता हूँ जिन्दगी की राहें, तेरी बाँहों... Read more
तेरी नजरों का तीर
तेरी नज़रों के तीर ने मेरे दिल पर ऐसा किया पृहार है जब भी आंख मिचता हूं बस तेरी सूरत नजर आती बार-बार है ऐसा... Read more
*** ये मूरत तेरी ****
ये मूरत तेरी दिल में उतर आई है तेरी सूरत पे लिखा जो ** मेरा नाम ** दिखलाई नहीं देता आँखों से दिल की नज़र... Read more