तेरी याराना पसंद है |ग़ज़ल|

मुस्कुरा कर दर्दे दिल छूपाना पसंद है
तुम्हें तो दिल जलाकर बहलाना पसंद है

देखना चाहते है तेरे चेहरे पर मुस्कान
ज़िंदगी से तेरे हर ग़म चुराना पसंद है

जानते है और भी होंगे तेरे चाहने वाले
फिर भी मुझे बस तेरी याराना पसंद है

भले ही तू न देख मुझे नज़रे चुरा-चुरा के
इस दीवाने को तेरी गलियों में आना पसंद है
मेरी मोहब्बत की कद्र नहीं तेरे दिल में
ये जानकर भी प्रीत बंधन निभाना पसंद है

दुष्यंत को देख अन्जान बनती है तू आज
फिर भी तेरी चाहत की गीत गाना पसंद है

कवि:-दुष्यंत कुमार पटेल “चित्रांश”

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