गीत · Reading time: 1 minute

तेरी याद का मौसम आया सै

फेर लौट कै सामण आया सै
तेरी याद्दा का मौसम लाया सै

फेर मिलै ना मिलै उन राहों पे
हमसे यो बतलावण आया सै

मिस्री के जैसा मीठा बरसेगा
हम- तुम, तन्हा तरसैगे फेर सै

इबकै ये सामण भी अंगड़ाई लेरा
मिलन- जुदाई लेकर मौसम आया सै

इत- उत पगली सी डोलूं बाग मैं
प्यासी जोगण जैसे सामण आया सै

रात बीती सारी आख्यामं बादल बरसे
मिलन की आस ले मन तरसे आया सै

इबकै सामण यूँ ही बीत जाग्गा
आख्यामं झरझर पानी बहवै सै
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

4 Likes · 5 Comments · 217 Views
Like
226 Posts · 32.9k Views
You may also like:
Loading...