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तेरी यादों का सिलसिला है

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

October 10, 2017

ये जो तेरी यादों का सिलसिला है
बड़ा ही कठिन सा ये जलजला है

प्यार करती है मुझसे मैं जानता हूँ
लेकिन मोहबत में हर दिल जला है

पथ्थरों की बौछार से मुझे डर कैसा
मोहबत में ये दिल किसका डरा है

वो छोड़कर मुझको गई है जबसे ही
यादो का उसकी मुझे ही आसरा है

लौटकर आई है वो अब मेरी चाह मैं
रब ही जाने कौन सा ये माजरा है

ये फूल खिलने से ही पहले टूट जाते
हर ओर नफरत का यहाँ सिलसिला है

प्यार चाहत और मोहबत सब भूलकर
बस नुमायश का ही अब दबदबा है

ये ऋषभ तुमको सिखाये क्या मोहबत
इस मोहबत से ही तो ये सरफिरा है

ऋषभ तोमर

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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