Feb 20, 2017 · कविता
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* तेरी मुस्कुराहट *

प्रेम सागर उथला है
थाह कभी आती नहीं ।
इक बार डूबने से
चाह कभी जाती नहीं ।।
*बहुत प्यारी तेरी मुस्कुराहट *
दिल को छू जाती है
ये आँखें शरबती चुपके
से पिला जाती है
दिल में हलचल
मचा देती है
इक कसक सी
छोड़ जाती है
अनजानी चाह
रह जाती है दिल में
दिल तुम्हारे पास ही
रहता है
जिस्मों में दूरी हो
चाहे बहुत
पर दिल
करीब रहता है
मुस्कुराती रहो तुम सदा
मेरी ख़ुशी इसी में है
देखना चाहता हूँ मै तुम्हे
मुस्कुराती रहो हमेशा ।।
?मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर... View full profile
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