तेरी ममता मेरा गहना है...

बाल मन मेरा बाल मन
इस पल भी रोया करता है
तेरी लोरी सुनने को आतुर
तेरी अंक मे सोया रहता है।

मैं निरीह सा ,नीड़ का शावक पंछी
राह पंख की ताका करता हूँ
छिप तेरे पंख की बाँहों में
निष्ठुर जग को देखा करता हूँ ।

तपती रेत सी यह दुनिया है
तू शीतल जल का झरना है
प्यास नहीं है धन दौलत की
बस तेरी गोद मे रहना है ।

सहे हैं कष्ट तूने मेरी खातिर
अब मुझको सुख तुझे देना है
हृदय में बसती हो माँ तुम
तेरी ममता मेरा गहना है ।

डॉ0 सीमा वर्मा
लखनऊ

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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