Skip to content

तेरी जुल्फ़ों का ज़ादू

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

December 2, 2016

मैंने कहा श्री मान जी!तेरी जुल्फ़ों में तो ज़ादू है।
श्री मानजी जी संवर उठे।
चंदन-से बिखर उठे।
सलमान-से निखर उठे।
मैंने फिर से कहा—-
श्री मान जी आपकी जुल्फ़ों में तो ज़ादू है।
पर आपकी जुल्फ़ों से निकल ये जुओं की बारात सजी आ रही है इनपर क्यों नहीं क़ाबू है।
श्री मानजी हाथ जुड़वा लीजिए,
पांव भी पकड़वा लीजिए,
पर इतना कर्म फ़रमा दीजिए।
अपनी जुल्फ़ों का ज़ादू ,
कहीं और जाकर चला लीजिए।
अच्छा होगा किसी हज़्ज़ाम के पास जा।
इन जुल्फ़ों को कटवा लीजिए।
कटवा लीजिए न……।

Author
Recommended Posts
तेरी जुल्फों की महकन से दूर हम जा नही सकते.. जो बालों पे लगे है फूल कभी मुरझा नहीं सकते...न्योछावर कर दी तुझपे अपनी सारी... Read more
तेरे प्यार में डूब जाने को जी करता है
आज फिर तेरे प्यार में डूब जाने को जी करता है, तुझसे मिल कर बिछड़ जाने को जी करता है। यूंँ तो तेरी खुशियों पर... Read more
बनावट
बनावट की है दुनिया,यहां बस तमाशा कीजिए अच्छे इंसा नही तो क्या, अदाकारी अच्छी कीजिए लगाकर सजीला मुखौटा,बदरंग चेहरा छुपा लीजिए सच से नही सरोकार,जितना... Read more
"ख़्वाहिश" तुम से ख़्वाहिश मेरी हमनशीं जानलो अपनी धड़कन में मुझको बसा लीजिए। पुष्प माला बना केश वेणी गुथूँ अपने तनमन में खुशबू रमा लीजिए।... Read more