Mar 21, 2017 · कविता
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तेरी चुप्पियां अब ,काटो की तरह चुभने लगी है ….

तेरी चुप्पिया अब,
काटो की तरह चुभने लगी है।
कुछ दिन से तो ,
मेरे साथ रात भी जगने लगी है।
ये जान गए की,
मिल नहीं पायंगे तुमसे।
लेकिन एक उम्मीद है,
जो जिंदगी के साथ चलने लगी है।
::::: :::::(अवनीश कुमार)
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Awneesh kumar
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