Skip to content

*** तेरी खुशबू आती है ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

January 15, 2017

15.1.17 सन्ध्या 6.00
हर हर्फ़ से तेरी खुशबू आती है

हर हर्फ़ से तूं सितम ढाती है

ये कमज़ोर दिल इंसान क्या करें

ना तेरी सुबह ना शाम आती है।।
?मधुप बैरागी

Share this:
Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
Recommended for you