तेरी इश्क़ की अदालत

आख़िर कैसे मिटा दोगे तुम मुझे यादो से,
और कैसे रोक लोगे मुझे तुम्हारे सपनो में आने से

तुम कर लो लाख बहाने तुम हमको न मिटा पाओगें,
यह बार बार हमे भुलाने के चकर में हर बार हमको याद कर जाओगे ।

फिर से रो देंगी तुम्हारी आँखे जब मेरा रुमाल तुम्हारे पास न होगा ,
नंबर तो होगा तेरे पास लेकिन फ़ोन लगाने का जिगर तेरे पास न होगा।

तुम मजबुर हो गयी हो अपनी गलतियों से,
तेरे पास प्यार तो होगा पर हमारे जैसा ख़ास ना होगा ।

और रहू भी बदनाम हो गयी हे तेरी इश्क़ की अदालत में ,
पैसा तो खूब होगा तेरे पास मगर रिश्वत के लिए वहाँ कोई तैयार ना होगा ।

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