Nov 21, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

तेरा यूँ रूठ कर जाना ..

छतरपुर के झरोखों से, किसी की राह को तकना
तेरे आने की चाहत में, सजीली आँख का थकना
नहीं भूला हूँ मैं अब तक, वो जीया साथ का हर पल
वो तेरे साथ में रोना, वो तेरे साथ में हँसना।

तेरा यूँ रूठ कर जाना, यूँ मुझसे दूर हो जाना
मुझे अच्छा नही लगता, मेरा मजबूर हो जाना
तू हैं तो हैं सभी खुशियाँ, तू हैं तो हैं सभी नगमे
तेरी बिछड़न हैं हाल-ए-दिल का, चकनाचूर हो जाना

– नीरज चौहान

116 Views
Copy link to share
Neeraj Chauhan
65 Posts · 20.4k Views
Follow 10 Followers
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के... View full profile
You may also like: