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तेरा यूँ रूठ कर जाना ..

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

November 21, 2016

छतरपुर के झरोखों से, किसी की राह को तकना
तेरे आने की चाहत में, सजीली आँख का थकना
नहीं भूला हूँ मैं अब तक, वो जीया साथ का हर पल
वो तेरे साथ में रोना, वो तेरे साथ में हँसना।

तेरा यूँ रूठ कर जाना, यूँ मुझसे दूर हो जाना
मुझे अच्छा नही लगता, मेरा मजबूर हो जाना
तू हैं तो हैं सभी खुशियाँ, तू हैं तो हैं सभी नगमे
तेरी बिछड़न हैं हाल-ए-दिल का, चकनाचूर हो जाना

– नीरज चौहान

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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