कविता · Reading time: 1 minute

तेरा,मेरा फेरा …..

छन्न पकैया छन्न पकैया ,दूभर है अब जीना
एक उधर फागुन बौराया,दूजा इधर कमीना
–छन्न पकैया छन्न पकैया ,चुनाव डूबा यूपी
–बिना चखना के बेमजा ही,अब फोकट वाली पी
छन्न पकैया छन्न पकैया ,शक्तिहीन है काया
सायकल छीना झपटी लगे ,कमल,मुलायम,माया
–छन्न पकैया छन्न पकैया ,अन्धकार में राजा
–लूटने वाले लूट रहे बस,बजा-बजा के बाजा
छन्न पकैया छन्न पकैया ,पी के छिपा दरोगा
किडनेपिंग,चोरी,अनाचार,भारी-भरकम होगा
–छन्न पकैया छन्न पकैया ,पास नहीं है पूंजी
–ग्यारह को जुबान है खुलना ,रहती कब तक गूंगी
छन्न पकैया छन्न पकैया ,सड़कों बीच तमाशा
देते भाषण नेता भ्रामक,फिर झांसे पर झांसा
–छन्न पकैया छन्न पकैया ,अपना भैय्या शेरा
–जनम-जनम का मिट जाएगा ,तेरा मेरा फेरा
सुशील यादव

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