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तेरा गगन मेरा गगन

कितना उदास आज है
तेरा गगन मेरा गगन
खग से भी वीरान है
तेरा गगन मेरा गगन

नीरवता के शोर में
है मन अजब बेचैन सा
सिसकी की भेंट चढ़ गया
तेरा अमन मेरा अमन

पुष्पित कभी जहाँ हुए
प्रेम के महके सुमन
कैसे हुआ उजाड़ अब
तेरा चमन मेरा चमन

लिखे जो प्रेम गीत थे
दिल के रक्तिम रंग से
बदरंग उनको कर गया
तेरा वहम मेरा वहम

मुँह पर न अब हँसी रही
शत शूल में फँसी रही
दोनों के लब सिल गया
तेरा अहम मेरा अहम

देखा किये विस्तृत नभ
नीम तले इक छोर से
नीम ही कर गया अलग
तेरा सहन मेरा सहन

-ओंम प्रकाश नौटियाल, बड़ौदा , मोबा.9427345810
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

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Om Prakash Nautiyal
Om Prakash Nautiyal
वड़ोदरा,गुजरात
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संक्षिप्त परिचय ओंम प्रकाश नौटियाल जन्म स्थान -कौलागढ़ , देहरादून ,उत्तराखण्ड M.Sc(Phy.) ,M.Sc.(Maths), MBA FIETE,SM-CSI,M-ISTD,SM-IEEE,SM-EMS...