Jun 14, 2019 · कविता

तेरा इंतज़ार

आपके आने की यूँ ख़बर तो हमें ना थी,
मग़र दिल में इन्तेजार, मुद्दतों का भरा रहा।
सोचा तुझे देखकर, बेपरवाह सा हुआ जाए,
मगर देखकर अनदेखा, किया भी ना जाये।

सोचा तेरे बारे में, तो दिल को सुकून आया,
भटकी राहों में जैसे, मैंने मंजिल को पाया।
लंबा रहा बिछड़ना, जैसे हर सांस पुकारती,
तेरे दीदार की खातिर, हमनें मुद्दतें गुजार दीं।

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