कहानी · Reading time: 2 minutes

तेज़ाब

खिड़की से चिड़िया के चाहने की आवाज… आज 15 साल की रागिनी के मन में नई चेतना का बीज बो रही थी । आज वह बहुत खुश थी; उसके चेहरे से पट्टी खुलने वाली थी । पूरे 6 महीने हो गए थे अस्पताल में रहते हुए । डॉक्टर कमरे में प्रवेश करता है । रागनी कैसी हो ?रागिनी खुश है; परंतु अंदर ही अंदर डरी भी हुई है । नर्स आईना लिए खड़ी है । डॉक्टर रागिनी की पट्टी खोलते हुए… रागिनी तुम्हें नई जिंदगी मुबारक हो, जीवन में आगे बढ़ना, कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना । नर्स आईना नज़दीक लाती है । रागिनी की चीख निकल जाती है । वह आईने से अपना मुंह पीछे कर लेती है । सड़क पर पड़ी थी भीड़ के चारों ओर तड़पती, कोई भी मदद के लिए नहीं आया था । उस दिन तड़प को बिना नापे रागिनी बेहोश हो गई थी मगर वह दर्द आज महसूस हो रहा है । उसका पूरा जीवन झुलसे हुए चेहरे के साथ कैसे बीतेगा आज वह जीकर भी अपने आपको मरा हुआ महसूस कर रही है । तेजाब ने उसके मुंह को ही नहीं बल्कि उसके पूरे जीवन को झुलसा दिया है ।
रागिनी सुबह हो गई है कब तक सोती रहोगी । उठो नए सवेरे का सूरज उग गया है । रागिनी उठते ही झट मां के सीने से लग जाती है । 26 साल की रागिनी चर्म विशेषज्ञ है ।वह उन लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत है जो अपने आपको इस स्थिति में असहाय समझती हैं । आज रागिनी ने दिखा दिया कि तेज़ाब उस पर नहीं बल्कि उन सभी गंदी सोच वाले लोगों पर पड़ा है जो अपने इरादों को नाकाम होता देखते हैं ।
तेजाब डालने वाला पंगु और अपाहिज है… वह भी दिमाग से ।

डॉ. नीरू मोहन ‘ वागीश्वरी ‘
शिक्षाविद्/प्रेरक वक्ता/लेखिका/ कवयित्री/समाजसेविका

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