मुक्तक · Reading time: 1 minute

तेइस मार्च

तेइस मार्च

कैसे कैसे वीरों की भूमि है माँ भारती मेरी,
देश के लिए जिन्होंने सर्वस्व लुटा डाला।
छोटी सी उम्र में ही देश प्रेम की जगा अलख,
हम सब को ऋणी अपना बना डाला।

लेना था जो बदला लाला जी की शहादत का,
सॉन्डर्स को गोलियों से छलनी तुमने कर डाला।
जाग रहे हैं हिन्दुस्तानी बताने बरतानिया को,
सेंट्रल असेम्बली को ही बम से उड़ा डाला।

हे वीर शहीद भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु,
याद रखेगा राष्ट्र जो बलिदान तुमने कर डाला।
तेईस मार्च को चूमा जब फांसी का फंदा तुमने,
बिगुल राष्ट्रवाद का जैसे देश भर में फूंक डाला।

शहीदों में नाम अपना खुशी खुशी लिखवाने को,
मौत को भी अपने गले हंस कर लगा डाला।
आज शहादत है जिन वीर हुतात्माओं की,
हाथ जोड़ सुमन श्रृद्धा के अर्पण मैने कर डाला।

हाथ जोड़ सुमन श्रृद्धा के अर्पण मैंने कर डाला।

संजय श्रीवास्तव
बालाघाट (मध्य प्रदेश)

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