तृप्ति

माया के जंजाल में, प्यासे सब इंसान
तृप्ति तभी होती यहाँ,भीतर उपजै ज्ञान
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

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सपने देखना कैसे छोड़ दूं सजाये अरमान कैसे तोड़ दूं हिन्दी, हरियाणवी में ग़ज़ल, गीत,...
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