"तू ही बता ज़िन्दगी"

“तू ही बता ज़िन्दगी”

तू ही बता ऐ ज़िन्दगी
तेरा मैं क्या करूँ,
मेरी हंसी तुझे रास नहीं आती,
मेरी उदासी मेरी माँ को नहीं भाती,
मैं तो बस मुस्कुराता हूँ,
तू रास्ते में तैयार मिलती है,
चिंता का नया सामान लिए 
मैं जब कभी उदास हो जाता हूँ,
माँ मेरा इंतजार करती है,
मेरे लिये एक नयी मुस्कान लिये
अब तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
तेरा मैं क्या करूँ,
न तू मुझे हँसने देती है,
न तू मुझे रोने देती है,
ग़लतफहमी है तेरी,
मैं तुझे छोड़ दूंगा
जीने की बड़ी चाहत है मेरी,
मैं तो हर पल को जीता रहूँगा,
मैं छोड़ दूँ तुझे ये तेरी चाहत है,
मेरी चाहतें मुझे तुझसे दूर जाने ही नहीं देती,
तेरे फ़रिश्ते मेरे पीछे रहते हैं,
मेरे पास आना चाहते हैं,
तुझे छीन ले जाना चाहते हैं,
मेरे फ़रिश्ते हर पल मेरे साथ चलते हैं,
तुझे हर पल मेरे साथ ही रखना चाहते हैं,
अब तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
तुझे साथ रखूं या छोड़ दूँ, जाने दूँ ऐसे ही,
अब तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
तेरा मैं क्या करूँ?

“संदीप कुमार”

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3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना"...
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