गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

तू मेरे मन मधुबन बन जा

मेरे प्रियतम तू मेरे मन मधुबन बन जा
भीगती रहूँ मैं तू ऐसा सावन बन जा

आ बसा लू तुझे अपनी साँसो में
मेरे दिल की तू धड़कन बन जा

तू मेरे साजन मेरे दिलवर मेरी जान है
आ मेरी चुडियोँ की खन-खन बन जा

तू ही मेरी दुनिया बस तुम्हें ही चाहा
आ मेरी पायल की छन-छन बन जा

तू मेरे लिये रब है ,मै तेरी पूजारिन हूँ
सतरंगी सपने सजाऊँ तूअन्तर्मन बन जा

कवि :दुष्यंत कुमार पटेल”चित्रांश”

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