मुक्तक · Reading time: 1 minute

तू मुझसे अनजान थी…

कुछ कहने का साथी तुझसे,
दिल में मेरे खयाल था।

तू मुझसे अनजान थी,
मैं तुझसे अनजान था,
कुछ कहने का साथी तुझसे,
दिल में मेरे खयाल था।

कहता भी मैं कुछ-कुछ तुझसे,
पर मेरी मजबूरी थी,
एक सहेली साथ थी तेरे,
और पूरा परिवार था

कुछ कहने का साथी तुझसे,
दिल में मेरे खयाल था।

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विश्व रिकॉर्ड धारक, युवा नेतृत्वकर्ता, रासेयो स्वयंसेवक, यंग अचीवर, लेखक, वक्ता Awards: उत्कृष्टता सम्मान, रासेयो राज्य स्तर पुरस्कार, वर्ल्ड यूथ एस्से प्रतियोगिता जर्मन में फाइनलिस्ट अवार्ड,. लेखन प्रतियोगिताओं में अनेक…
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