"तू जग से प्यारी है माँ"

तू जग से प्यारी है माँ सुन्दर और तू न्यारी है माँ
जब मैं छोटा बच्चा था तब तेरा गुस्सा करना, था लगता मुझको बुरा माँ
अब चाहता हूँ तू गुस्सा कर, अब तेरी डांट सुनने को जी चाहता है माँ
तुम पर मेरा गुस्सा करना, था ये सब ना समझी माँ
लेकिन तेरा मुझको कैसे भी मनाना, होता था ये बारम-बार माँ
भगवान ने तुझको है बचाया मेरे लिए बारम-बार माँ
वो सब दिन याद है माँ जब होती थी तू बीमार
सहम जाता हूँ आज भी माँ जब होती है तू बीमार
तू जग से प्यारी है माँ सुन्दर और तू न्यारी है माँ

माँ तू तो बहुत अनमोल है तेरा कोई तौल नहीं माँ
पता मुझे बहुत बाद चला वो सब था ना समझी माँ
हाँ वक़्त बहुत ज्यादा लगा ये समझने में मेरी माँ
काश! मुझे समझ आ जाती जल्दी, तो ना करता वो गलती माँ
तू कितनी दया वाली है जो मुझे सहते सहते यूँ रह गयी माँ
तुमने मेरी गलती को अपने गले से है लगाते रह गयी माँ
गलती जो कर गया हूँ मैं भुला देना उस गलती को माँ
तू अनमोल है इस जहाँ में, एहसास नहीं था मुझको माँ
तुझे रुलाया कितना मैं माँ काश मुझे मिल जाती सजा माँ
अब ना रुलाऊंगा तुझको मैं जब तक साँस चलेगी माँ
तू जग से प्यारी है माँ सुन्दर और तू न्यारी है माँ

नीरज समस्तीपुरी
बिहार
7044515986

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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