May 3, 2021 · कविता
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तू चल ऐ जिंदगी

तू विश्व कल्याण शिखर तक चल ऐ ज़िंदगी।
मनुष्य को सही राह दिखा ऐ ज़िंदगी।
अंधेरों में भी रोशनी कर दिखा ऐ ज़िंदगी।
संघर्ष भरे रत्नों से जहां निखार ऐ ज़िंदगी।
बेचैन मन को महान लक्ष्य दिखा ऐ ज़िंदगी।
राह जो चाहें हों उसे मंजिल तक पहुंचा ऐ ज़िंदगी।
मेहनत का महत्व मानव जाति को बता ऐ ज़िंदगी।
सांसों से भी तूफ़ान तू उठा ऐ ज़िंदगी।
आंसुओं से भी सागर बना ऐ जिंदगी।
गुलामी की जंजीर तोड़ना सिखा ऐ ज़िंदगी।
मनस्थिति छोड़ परिस्थिति पर ध्यान लगा ऐ ज़िंदगी।
लक्ष्य पर अडिग खड़ा रहना सिखा ऐ ज़िंदगी।
हार से डरे बिना आगे बढ़ते जा ऐ ज़िंदगी।
कुदरत को जिद के आगे झुका ऐ ज़िंदगी।
आलस्य करने में आलस्य करो ये बता ऐ ज़िंदगी।
बिना रुके बिना थमे आगे चलते तू जा ऐ ज़िंदगी।
मोह माया की पाबंदियां भी तोड़ दिखा ऐ ज़िंदगी।
मनुष्य को जीने का उद्देश्य तू बता ऐ ज़िंदगी।
नकारात्मकता का तूफ़ान दूर कर दिखा ऐ ज़िंदगी।
सकारात्मकता से रिश्ता बनाकर तू चल ऐ ज़िंदगी।
हाथ से हाथ मिलाकर चलते तू जा ऐ ज़िंदगी।
आशाओं के दीप जलाते चल ऐ ज़िंदगी।

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Taran Singh Verma
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My Name Is Taran(Chotu) Verma And I Am A Agriculture College Student From Chhattisgarh state View full profile
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