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तू इश्क, तू खूदा

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तू इश्क , तू खूदा,
तू इबादत है मेरी।
तुमको पाकर पूरी हुई ,
हर चाहत मेरी।

तेरे बाहों के घेरे में,
है जन्नत मेरी।
यही चैन पाती है
सुकुन जिन्दगी मेरी।

ख्बाईश-ए -जिन्दगी,
बस इतनी सी है मेरी,
तेरे बाहों में ही
जान निकले मेरी।
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—लक्ष्मी सिंह

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लक्ष्मी सिंह
लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली
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