कविता · Reading time: 1 minute

तू आगे बढ़

कर साहस भर उमंग आगे तू बढ़,
मुश्किलो को कर पार तू जीत गढ़,
राह की बाधाओं को चूम तू पहाड़ चढ़,
हार नहीं ला नई सोच तू अब लड़,
लड़ नही सके तो तू मैदान में डट,
डूबने के डर से तू न छोड़ तट,
कब तक रहेगा बनकर तू नट,
सुनाता रहेगा बनकर तोते की तू रट,
कभी तो अंतर्मन की आवाज तू सुन,
एक बार तो जगा ले अपने सोये तू गुन,
हो उन्नति सबकी ऐसी राह अब तू चुन,
।।।जेपीएल।।

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जे पी लववंशी, एमएससी (मैथ्स), एमए ( इतिहास, हिंदी, राजनीति विज्ञान) "कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और…
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