कविता · Reading time: 1 minute

तू अकेला भी जल

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तूअकेला भी जल
भूले भटके राही का
पथ प्रदर्शित कर।

तू अकेला ही सही
आँधी – तुफानों
से डरना नहीं
जल निर्भय,निडर।

एक दीया भी काफी है
रोशनी के लिए।
एक अकेला काफी है
दुनिया बदलने के लिए।

दीप शिक्षा का दान कर
ज्ञान का प्रकाश भर
मन का अंधकार हर
तू अकेला भी जल।
????—लक्ष्मी सिंह

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