तूफ़ा में डूबा साहिल नजर नही आता

*तूफ़ा में डुबा साहिल नजर नही आता*

◆ऐसा नहीं के वो मेरे शहर नही आता,
धुँधली यादों में वो नज़र नहीं आता।

◆चली आती है कहर बन यादें उनकी
तूफान में डूबा साहिल नज़र नही आता।

◆कितनी राते गुज़री है रो रोकर मेरी,,
खुशियों का अब वो मंजर नजर नही आता।

◆उदासी चेहरे पर है कितनी मेरे,,
लबों को अब मुस्कुराना नही आता।

◆इश्क में दिल टूटा है कई बार हमारा
अब गैरों पर बिल्कुल यक़ीन नही आता।

◆दूरियां बड़ा रहे अजनबी समझकर मुझसे,,
क्यूँ अब उनको मुझे अपना बनाना नही आता।

◆नग़्मे तो किताबों में पड़े है बहुत
पर जाने क्यूँ अब मुझे गुनगुनाना नही आता।

*गायत्री सोनु जैन*

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 178

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share