गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

तूने देख ली मुझे इस नजर

तूने देख ली मुझे इस नजर
भूल गया मैं अपना भी घर

कातिल निगाहें न जाने क्या
हो मुहब्बत से अब कैसा डर

ख़ामोश लबों से उसने कहा
आओ चले इश्क की डगर

दिल तेरी ओर खींचा जा रहा
मीठी बातों से ढ़ाओ न कहर

राही भी अब रहता गुमनाम
देख ली जब से रश्क़े क़मर

📝 रवि कुमार सैनी ‘राही’

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