'तुम हो' --नज्म

कडकती धूप में ठंडी छांव-सी
सर्द मौसम में गर्माहट-सी
मेरे दिल की धडकन
मेरी जिंदगी
मेरी खुशी
मेरी पूरक
जीवन की भागदौड में भटकन के समय
मेरी पथप्रदर्शक
हो जाता कभी गुरूर मुझे अपने पर
दिखाती आईना और
खता माफ करती
मेरी आखों का चैन और सुकून
तुम हो
क्या कहूँ प्रिय बहुत ही खूबसूरत
तुम हो।

–अशोक छाबडा.

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